जय सतनाम।
जय गुरु घासीदास दास बाबा।
बाबा जी का जन्म 18 दिसंबर सन् 1756दिन सोमवार को छत्तीसगढ़ बलोदा बाज़ार जिले के गिरौधपुरी नामक गांव में हुआ ।आज हम 2 विषय मे बात करेंगे
1 कि बाबा जी के बारे में हम किया जानते है।और किया जो जानते है वो पूर्ण रूप से सत्य है?
2आज का युग आधुनिक युग है इंटर नेट का जमाना है।हम बाबा जी के बारे में किया पढ़ते है इंटरनेट से?
यह बात पूरी तरह से सत्य है कि बाबा जी के पास अलौकिक शक्ति थी ।
बाबा जी सत्य की महिमा दिखाते थे
बाबा जी प्राकृति के नियम के को उलटने की शक्ति रखते थे जैसे कि मेरे हुए जीव को जीवित करना ।
सुनने में विश्वास नई होता है ।किन्तु यह सत्य है
इसका प्रमाण गिरौधपुरी में आज भी है।
बाबा जी
जब छाता पहाड़ में तपस्या कर लौटे ।
तो माता सफुरा की मृत्यु हो चुकी थी।
तब बाबाजी ने गांव वालो
को बुलाकर
कहा कि मै अपनी पत्नी सफुरा को जिंदा करूंगा मुझे उसकी समाधि दिखाए।
गांव वालो को बाबा जी के बातो का विश्वास नहीं हुआ।
तब गाव के लोगो ने कहा कि बाबा जी ।
यदि आप माता सफुरा को जीवित कर सकते है तो आज हमारे गांव में एक गाय का बच्चा मरा पड़ा है।
पहले उस बछड़े को जीवित कर दीजिए फिर हम आपको माता सफुरा की समाधि दिखाएंगे।
बाबा जी ने उस बछड़े को जीवित किया।और उस स्थान में मंदिर का निमार्ण किया गया है जो आज भी गीरौध पूरी में स्थित है।यह मंदिर इस बात का प्रमाण है कि बाबा जी ने उस मृत बछड़े को जीवित किया।
उसके बाद बाबा जी ने माता सफुरा को भी जीवित किया।।।।
इस तरह की और भी महिमा है बाबा जी के।
जो इंटरनेट में बाबा जी के जीवन परिचय में नहीं
है।ऐसे में आने वाली पीढ़ी तो इस सत्य से वंचित रह जाएगी।
जय सतनाम
आपको यह जानकारी कैसी लगी कमेन्ट करके बताएं
जय गुरु घासीदास दास बाबा।
बाबा जी का जन्म 18 दिसंबर सन् 1756दिन सोमवार को छत्तीसगढ़ बलोदा बाज़ार जिले के गिरौधपुरी नामक गांव में हुआ ।आज हम 2 विषय मे बात करेंगे
1 कि बाबा जी के बारे में हम किया जानते है।और किया जो जानते है वो पूर्ण रूप से सत्य है?
2आज का युग आधुनिक युग है इंटर नेट का जमाना है।हम बाबा जी के बारे में किया पढ़ते है इंटरनेट से?
यह बात पूरी तरह से सत्य है कि बाबा जी के पास अलौकिक शक्ति थी ।
बाबा जी सत्य की महिमा दिखाते थे
बाबा जी प्राकृति के नियम के को उलटने की शक्ति रखते थे जैसे कि मेरे हुए जीव को जीवित करना ।
सुनने में विश्वास नई होता है ।किन्तु यह सत्य है
इसका प्रमाण गिरौधपुरी में आज भी है।
बाबा जी
जब छाता पहाड़ में तपस्या कर लौटे ।
तो माता सफुरा की मृत्यु हो चुकी थी।
तब बाबाजी ने गांव वालो
को बुलाकर
कहा कि मै अपनी पत्नी सफुरा को जिंदा करूंगा मुझे उसकी समाधि दिखाए।
गांव वालो को बाबा जी के बातो का विश्वास नहीं हुआ।
तब गाव के लोगो ने कहा कि बाबा जी ।
यदि आप माता सफुरा को जीवित कर सकते है तो आज हमारे गांव में एक गाय का बच्चा मरा पड़ा है।
पहले उस बछड़े को जीवित कर दीजिए फिर हम आपको माता सफुरा की समाधि दिखाएंगे।
बाबा जी ने उस बछड़े को जीवित किया।और उस स्थान में मंदिर का निमार्ण किया गया है जो आज भी गीरौध पूरी में स्थित है।यह मंदिर इस बात का प्रमाण है कि बाबा जी ने उस मृत बछड़े को जीवित किया।
उसके बाद बाबा जी ने माता सफुरा को भी जीवित किया।।।।
इस तरह की और भी महिमा है बाबा जी के।
जो इंटरनेट में बाबा जी के जीवन परिचय में नहीं
है।ऐसे में आने वाली पीढ़ी तो इस सत्य से वंचित रह जाएगी।
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